किडनी की बीमारी में अपनी मर्ज़ी से दवाइयों की मात्रा बदलना क्यों नुकसानदायक हो सकता है?

किडनी की बीमारी का पता चलने के बाद मरीज को अक्सर कुछ दवाइयाँ नियमित रूप से लेने की सलाह दी जाती है। इनमें ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी से जुड़ी दूसरी समस्याओं को नियंत्रित रखने वाली दवाइयाँ शामिल हो सकती हैं।

लेकिन कई बार मरीज खुद ही दवाइयों में बदलाव करने लगते हैं। किसी को लगता है कि अब तबीयत ठीक है, इसलिए दवा कम कर देनी चाहिए। कोई दवा लेने के बाद परेशानी महसूस होने पर उसे बंद कर देता है, तो कोई जल्दी आराम पाने के लिए उसकी मात्रा बढ़ा लेता है।

सुनने में ये छोटे बदलाव लग सकते हैं, लेकिन किडनी की बीमारी में इनका असर गंभीर हो सकता है।

दरअसल, किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर से कुछ दवाइयाँ बाहर निकलने में ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में पहले से ली जा रही दवा की मात्रा भी दोबारा जाँचने की जरूरत पड़ सकती है।

इसलिए किडनी की बीमारी में दवा कम करना, बढ़ाना या बंद करना हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।

किडनी की बीमारी में दवाइयों का खास ध्यान रखना क्यों जरूरी है?

हमारी किडनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने का काम करती है। इसके साथ ही कुछ दवाइयों और उनके टूटने से बने पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में भी उसकी भूमिका होती है।

जब किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती, तो कुछ दवाइयाँ शरीर से धीरे बाहर निकलती हैं। इससे उनका असर ज्यादा समय तक रह सकता है और कुछ मामलों में वे शरीर में जमा भी हो सकती हैं।

हालाँकि, हर दवा किडनी के जरिए ही बाहर नहीं निकलती। कुछ दवाइयाँ लिवर के माध्यम से भी शरीर से बाहर जाती हैं। इसलिए हर मरीज की दवा और उसकी मात्रा अलग-अलग हो सकती है।

यही वजह है कि किडनी की बीमारी में दवाइयाँ लेते समय सावधानी रखना जरूरी है।

अपनी मर्ज़ी से दवाइयों की मात्रा बदलने पर क्या हो सकता है?

कई मरीजों को लगता है कि दवा की थोड़ी मात्रा कम या ज्यादा करने से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन ऐसा मानना सही नहीं है। इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सी दवा ली जा रही है और मरीज की किडनी कितनी काम कर रही है।

  1. दवा शरीर में जमा हो सकती है

किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर कुछ दवाइयाँ शरीर से सामान्य गति से बाहर नहीं निकल पातीं। अगर ऐसी दवा जरूरत से ज्यादा मात्रा में ली जाए, तो उसका असर बढ़ सकता है।

कुछ दवाओं के मामले में इससे चक्कर आना, ज्यादा नींद आना, भ्रम या दूसरी परेशानियाँ हो सकती हैं। कुछ दवाइयों से लो ब्लड शुगर, रक्तस्राव या दिल की धड़कन में बदलाव का जोखिम भी हो सकता है।

  1. दवा कम करने से BP और शुगर बढ़ सकते हैं

मान लीजिए किसी मरीज का ब्लड प्रेशर दवा लेने के बाद सामान्य रहने लगा है। उसे लग सकता है कि अब दवा की जरूरत नहीं है।

लेकिन BP सामान्य रहने की एक वजह नियमित दवा लेना भी हो सकती है। ऐसे में बिना डॉक्टर से पूछे दवा कम करने या बंद करने पर ब्लड प्रेशर फिर बढ़ सकता है।

डायबिटीज की दवाइयों के साथ भी ऐसा हो सकता है। इसलिए रिपोर्ट में शुगर सामान्य दिखने पर अपनी मर्जी से दवा कम करना ठीक नहीं है।

  1. ज्यादा दवा लेने से साइड इफेक्ट बढ़ सकते हैं

कभी-कभी मरीज को लगता है कि दवा से पर्याप्त आराम नहीं मिल रहा, इसलिए थोड़ी ज्यादा मात्रा लेने से फायदा होगा।

लेकिन दवा ज्यादा लेने का मतलब बेहतर परिणाम नहीं होता। उल्टा, कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट बढ़ सकते हैं। किडनी की बीमारी में यह बात खास तौर पर ध्यान में रखनी चाहिए।

  1. दवा अचानक बंद करने से पुरानी समस्या फिर बढ़ सकती है

कुछ दवाइयाँ नियमित रूप से लेना जरूरी होता है। उन्हें अचानक बंद करने से ब्लड प्रेशर, शुगर या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएँ दोबारा बिगड़ सकती हैं।

अगर किसी दवा से परेशानी हो रही है, तो उसे खुद से बंद न करें। डॉक्टर को बताएं। जरूरत पड़ने पर वे दवा बदल सकते हैं या उसकी मात्रा में बदलाव कर सकते हैं।

किडनी के मरीजों के लिए दवा की मात्रा कैसे तय होती है?

हर मरीज को एक जैसी दवाइयाँ या एक जैसी मात्रा देना सही नहीं होता। डॉक्टर कुछ जरूरी बातों को देखकर दवा का चुनाव करते हैं।

किडनी की कार्यक्षमता (eGFR): eGFR से पता चलता है कि किडनी खून को कितनी अच्छी तरह छान रही है। कुछ दवाइयों की मात्रा तय करते समय इस रिपोर्ट को ध्यान में रखा जाता है।

उम्र और वजन: मरीज की उम्र और शरीर का वजन भी कुछ दवाइयों के असर को प्रभावित कर सकते हैं।

अन्य बीमारियाँ: डायबिटीज, हाई BP और हृदय से जुड़ी समस्याओं को देखते हुए दवाइयों का चुनाव किया जाता है।

पहले से चल रही दवाइयाँ: अगर मरीज एक साथ कई दवाइयाँ ले रहा है, तो यह देखना जरूरी होता है कि वे एक-दूसरे के साथ कैसी प्रतिक्रिया कर सकती हैं।

ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट: कुछ दवाइयों के इस्तेमाल के दौरान Potassium और दूसरे Electrolytes की जाँच भी जरूरी हो सकती है।

इन सभी बातों को ध्यान में रखकर डॉक्टर तय करते हैं कि कौन-सी दवा कितनी मात्रा में और कितने समय तक लेनी है।

क्या किडनी की बीमारी में सभी दवाइयाँ नुकसान करती हैं?

नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है।

किडनी की बीमारी होने पर दवाइयाँ बंद करना इसका समाधान नहीं है। कई दवाइयाँ ऐसी होती हैं जो ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नियंत्रित रखने के साथ-साथ किडनी से जुड़ी समस्याओं के प्रबंधन में भी मदद करती हैं।

कुछ दवाइयों की मात्रा बदलने की जरूरत हो सकती है, जबकि कुछ पहले की तरह जारी रखी जा सकती हैं। यह पूरी तरह दवा और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

दर्द होने पर भी बिना पूछे कोई दवा लेना ठीक नहीं है। उदाहरण के लिए, कुछ दर्द निवारक दवाइयाँ (NSAIDs) लंबे समय तक या अधिक मात्रा में लेने से किडनी को नुकसान पहुँचा सकती हैं।

इसी तरह, आयुर्वेदिक दवाइयाँ, हर्बल उत्पाद या सप्लीमेंट्स ले रहे हैं, तो उनकी जानकारी भी अपने डॉक्टर को जरूर दें। प्राकृतिक होने का मतलब यह नहीं कि हर उत्पाद किडनी की बीमारी में सुरक्षित होगा।

दवाइयाँ लेते समय किन बातों का ध्यान रखें?

रोजाना कई दवाइयाँ लेनी पड़ती हों, तो कभी-कभी मरीज को यह समझना मुश्किल हो सकता है कि कौन-सी दवा कब लेनी है। ऐसे में कुछ छोटी आदतें मददगार हो सकती हैं।

  • डॉक्टर ने जिस समय और तरीके से दवा लेने को कहा है, उसी का पालन करें।
  • अपनी मर्जी से दवा की मात्रा कम या ज्यादा न करें।
  • कोई दवा बंद करने से पहले डॉक्टर से बात करें।
  • दर्द होने पर बिना सलाह के दर्द निवारक दवा न लें।
  • आयुर्वेदिक दवाइयों और सप्लीमेंट्स की जानकारी भी डॉक्टर को दें।
  • अपनी सभी दवाइयों की एक सूची बनाकर रखें।
  • समय-समय पर जरूरी जाँच करवाते रहें।

अगर कोई दवा लेना भूल जाएँ, तो अगली बार उसकी दोहरी मात्रा न लें। ऐसी स्थिति में दवा के निर्देश देखें या डॉक्टर अथवा फार्मासिस्ट से पूछें।

दवाइयों की दोबारा जाँच कब करवानी चाहिए?

किडनी की बीमारी में समय के साथ उसकी कार्यक्षमता में बदलाव आ सकता है। ऐसे में जो दवाइयाँ पहले सही मात्रा में दी गई थीं, उनकी दोबारा समीक्षा की जरूरत पड़ सकती है।

उदाहरण के लिए, अगर Creatinine या eGFR की रिपोर्ट में बदलाव आया है, कोई नई बीमारी हुई है या मरीज को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है, तो डॉक्टर से दवाइयों के बारे में दोबारा चर्चा करनी चाहिए।

नई दवा शुरू करते समय भी पहले से ली जा रही दवाइयों की जानकारी देना जरूरी है। इससे दवाओं के बीच होने वाली संभावित प्रतिक्रिया को समझने में मदद मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  1. क्या किडनी की बीमारी में दवाइयों की मात्रा हमेशा कम करनी पड़ती है?

नहीं। हर दवा की मात्रा कम करना जरूरी नहीं होता। कुछ दवाइयाँ पहले की तरह ली जा सकती हैं, जबकि कुछ की मात्रा या उन्हें लेने का समय बदलना पड़ सकता है। यह दवा और किडनी की कार्यक्षमता पर निर्भर करता है।

  1. दवा लेने के बाद चक्कर या कमजोरी महसूस हो, तो क्या करें?

ऐसी परेशानी होने पर डॉक्टर को बताएं। इसके पीछे दवा का साइड इफेक्ट हो सकता है, लेकिन दूसरे कारण भी संभव हैं। जाँच के बाद डॉक्टर तय करेंगे कि दवा में बदलाव की जरूरत है या नहीं।

  1. क्या किडनी की बीमारी में दर्द की दवाइयाँ लेना सुरक्षित है?

हर दर्द निवारक दवा किडनी के मरीजों के लिए सुरक्षित नहीं होती। कुछ NSAIDs दवाइयाँ किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए दर्द होने पर अपनी मर्जी से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सही विकल्प पूछें।

  1. Creatinine बढ़ने पर क्या सभी दवाइयाँ बदलनी पड़ती हैं?

नहीं। केवल Creatinine बढ़ने से सभी दवाइयाँ बदलने की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर eGFR, दवा की प्रकृति, मरीज की उम्र और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं को देखकर फैसला करते हैं।

  1. क्या आयुर्वेदिक या हर्बल दवाइयाँ भी किडनी को प्रभावित कर सकती हैं?

कुछ आयुर्वेदिक और हर्बल उत्पादों में ऐसे तत्व हो सकते हैं जो किडनी की बीमारी में नुकसान पहुँचा सकते हैं या दूसरी दवाइयों के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं। इसलिए इन्हें लेने से पहले डॉक्टर को इनके बारे में बताना जरूरी है।

निष्कर्ष

किडनी की बीमारी में दवाइयाँ नियमित रूप से लेना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उन्हें सही तरीके से लेना। कभी तबीयत ठीक लगने पर दवा कम कर देना या किसी परेशानी के कारण उसे अचानक बंद कर देना सही फैसला नहीं है।

किडनी की कार्यक्षमता में बदलाव आने पर दवाइयों की मात्रा में भी बदलाव की जरूरत हो सकती है। लेकिन यह फैसला केवल रिपोर्ट देखकर या अपनी सुविधा के अनुसार नहीं लेना चाहिए।

इसलिए किडनी की बीमारी में कोई भी दवा शुरू करने, बंद करने या उसकी मात्रा बदलने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

चिकित्सकीय सूचना: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यह व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। अपनी दवाइयों में कोई भी बदलाव करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *